श्री रामचरितमानस में वर्णित नीति विषयक दोहे
(Moral values enshrined in Shri Ramcharitmanas)
गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी भाषा के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक हैं । उनका जन्म उत्तरप्रदेश के ग्राम राजापुर (वर्तमान चित्रकूट जिला) में सन् 1497 (सम्वत् 1554) में हुआ था । कुछ विद्वान् तुलसीदास जी का जन्म विक्रमी सम्वत् 1568 में सोरों (शूकरक्षेत्र) में मानते हैं । उनकी माता का नाम हुलसी, पत्नी का नाम रत्नावली और गुरू का नाम नरहरिदास था । उनका स्वर्गवास 1623 (विक्रमी सम्वत् 1680) में अस्सीघाट, वाराणसी में हुआ था । वैष्णवमत के अनुयायी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस, विनयपत्रिका, दोहावली, कवितावली, हनुमान चालीसा, वैराग्य सन्दीपनी, जानकी मंगल, पार्वती मंगल इत्यादि कुल १२ ग्रन्थ लिखे । उन्हें आदि काव्य 'रामायण' के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है । तुलसीदास जी को गोस्वामी, अभिनववाल्मीकि आदि सम्मान से सम्बोधित किया जाता है । श्री रामचरितमानस प्रकारान्तर से अवधी भाषा में वाल्मीकि रामायण की प्रतिकृति है जिसमें गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा वेद, पुराण, स्मृति आदि प्राचीन भारतीय शास्त्रों से नीतिविषयक महत्वपूर्ण सामग्री लेकर उसे भगवान् श्रीरामचन्द्र जी की जीवनगाथा में सम्यक् रूप से पिरोकर अत्यन्त मनोहारी ढंग से लोकभाषा में अपने अन्त:करण के सुख के लिए लिखा गया है । तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के आरम्भ में स्वयं लिखा है -
नानापुराण-निगम-आगम-सम्मतम् ,
यद् रामायणे निगदितं क्वचित् अन्यतोअपि ।
स्वान्त: सुखाय तुलसी रघुनाथगाथा ,
भाषा निबन्धम् अतिमंजुलमातनोति ।। 7 बालकांड ।।
त्रेतायुग के ऐतिहासिक 'राम-रावण युद्ध' पर आधारित तुलसीदास के प्रबन्ध काव्य रामचरितमानस को विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्यों में 46 वाँ स्थान दिया गया है। श्रीरामचरितमानस की रचना संवत् 1631 में प्रारम्भ हुई। दैवयोग से उस वर्ष रामनवमी के दिन वैसा ही योग आया जैसा त्रेतायुगमें राम-जन्म के दिन था। दो वर्ष, सात महीनें और छ्ब्बीस दिन में यह अद्भुत ग्रन्थ सम्पन्न हुआ। संवत् 1633 के मार्गशीर्ष शुक्लपक्ष में राम-विवाह के दिन सातों काण्ड पूर्ण हो गये जिसके बाद तुलसीदास काशी चले गये जहाँ उन्होंने भगवान् विश्वनाथ और माता अन्नपूर्णा को अपनी कृति श्रीरामचरितमानस सुनाई । हिन्दूधर्म के वैष्णवमतानुयायी श्रीरामचन्द्र को भगवान मानते हैं। सम्पूर्ण उत्तर-भारत में लोगों द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित भगवान श्रीरामचन्द्र की जीवनगाथा 'श्रीरामचरितमानस' का नियमित पाठ बड़े भक्तिभाव से किया जाता है ।
गोस्वामी तुलसीदास जी की इस अनुपम धार्मिक कृति में समाहित नीति सम्बन्धी दोहों और चौपाइयों को यहाँ हिन्दी और अंग्रेजी अनुवाद सहित प्रस्तुत किया जा रहा है। आशा है ज्ञानार्जन के लिए उत्सुक लोग इस प्रयास से लाभान्वित होंगे ।
No comments:
Post a Comment